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*बंद कुटिया से संत लापता: रामझर महादेव मंदिर में रहस्य ने बढ़ाई सनसनी* *लीलाधर अहिरवार कि विशेष रिपोर्ट जीरन जिला नीमच मध्य प्रदेश से* जीरन। क्षेत्र के समीप स्थित पौराणिक एवं सिद्ध स्थल रामझर महादेव मंदिर में सोमवार सुबह एक ऐसी रहस्यमयी घटना सामने आई, जिसने क्षेत्रभर में सनसनी फैला दी है। वर्षों से यहां तपस्यारत संत कन्हैयालाल जी महाराज अपनी ही बंद कुटिया से अचानक लापता हो गए। हैरानी की बात यह है कि कुटिया का दरवाजा अंदर से बंद था, जिससे यह घटना एक गहरे रहस्य में बदल गई है। प्रतिदिन की तरह सुबह मंदिर समिति के सेवादार महाराज को दूध देने पहुंचे। उन्होंने बाहर से आवाज लगाई, लेकिन काफी देर तक कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। संदेह होने पर अन्य समिति सदस्यों को बुलाया गया। जब सभी की मौजूदगी में दरवाजा तोड़ा गया, तो अंदर का दृश्य देखकर सभी स्तब्ध रह गए। कुटिया का मुख्य दरवाजा अंदर से बंद था। अंदर कोई दूसरी निकासी—न दरवाजा, न खिड़की—मौजूद नहीं है। कमरे में महाराज का मोबाइल, खड़ाऊं, वस्त्र, झोला और सहारे की लकड़ी सभी सामान यथास्थान मिले। ऐसे में यह सवाल और गहराता जा रहा है कि आखिर वे बिना कोई निशान छोड़े बाहर कैसे गए? पूरी कुटिया और ध्यान कक्ष की गहन तलाशी ली गई, लेकिन संत का कोई सुराग नहीं मिला। उनकी शारीरिक स्थिति को देखते हुए बिना लकड़ी के चल पाना भी मुश्किल था, फिर भी उनकी लाठी कमरे में ही पाई गई। यह घटना लोगों के लिए आस्था और रहस्य का केंद्र बन गई है। जीरन पुलिस डायल 112 और चीताखेड़ा पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस हर पहलू से जांच कर रही है, लेकिन ‘बंद कमरे’ का यह रहस्य फिलहाल सुलझता नजर नहीं आ रहा। घटना के बाद से रामझर महादेव मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं और ग्रामीणों की भारी भीड़ जुट गई है। हर कोई इस अनोखी घटना को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं कर रहा है।

 *बंद कुटिया से संत लापता: रामझर महादेव मंदिर का रहस्य बताया गया*


*लीलाधर अहिरवार की विशेष रिपोर्ट जीरन जिला नीमच मध्य प्रदेश से*


जीरन। रामझार महादेव मंदिर क्षेत्र में स्थित पौराणिक एवं सिद्ध स्थल पर सोमवार की सुबह एक ऐसी रहस्यमयी घटना सामने आई, जिसका क्षेत्रभर में अनावरण किया गया है। वर्षों से यहां तपस्यारत संतलाल जी महाराज अपनी ही बंद कुटिया से अचानक लापता हो गए थे। पुरानी बात यह है कि कुटिया का दरवाजा अंदर से बंद था, जिससे इस घटना में एक गहरा रहस्य बदल गया है।

प्रतिदिन की तरह सुबह मंदिर समिति के सेवादार महाराज को दूध पिलाया जाता है। उन्होंने बाहर से आवाज दी, लेकिन काफी देर तक कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। संदेह होने पर अन्य समितियों को बुलाया गया। जब सभी के प्रतिष्ठान में दरवाजा खोला गया, तो अंदर का दृश्य देखने पर सभी स्तब्ध रह गये।

कुटिया का मुख्य दरवाजा अंदर से बंद था। अंदर कोई अलग विज्ञापन-न दरवाजा, न खिड़की-मौजूद नहीं है। कमरे में महाराज का मोबाइल, खड़ाऊं, कपड़ा, झोला और लकड़ी का सारा सामान यथास्थान मिला। ऐसे में यह सवाल और गहराई से जा रहा है कि आखिर वे बिना कोई निशान छोड़े कैसे गए?

पूरी कुटिया और ध्यान कक्ष की गहराई तक पहुंच गई, लेकिन संत का कोई सुराग नहीं मिला। उनकी शारीरिक स्थिति को देखते हुए बिना लकड़ी के चलना भी मुश्किल था, फिर भी उनके लाठी वाले कमरे में ही पैग चला गया। यह घटना लोगों के लिए आस्था और रहस्य का केंद्र बनी है।

 जीरन पुलिस डायल 112 और चीता नियुक्त पुलिस सहयोगी पर टिपण्णी। पुलिस हर जांचकर्ता से जांच कर रही है, लेकिन 'कमरे' का यह रहस्य पता नहीं चल रहा है।

घटना के बाद रामझार महादेव मंदिर परिसर में भक्तों और मूर्तियों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। हर कोई इस अनोखी घटना को लेकर तरह-तरह की चर्चा कर रहा है।

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